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Thursday, August 13, 2015

भूख और नींद पर विजय प्राप्त करना


तैलकन्द नाम का कमलकन्द के समान प्रसिद्ध कन्द है ।
इसके पत्ते कमल जैसे होते हैं । इस कन्द से सदा तेल चूता रहता है । पानी में दस हाथ की दूरी तक ये तेल फ़ैला रहता है ।
इसके नीचे हमेशा एक महाविषधर रहता है । 
--इस कन्द की पहचान ये है कि इसमें लोहे की सुई प्रविष्ट करायें तो सुई तुरन्त घुल जाती है । 
--इस कन्द को लाकर तीन बार शुद्ध पारे के साथ खरल में पीसो । फ़िर इसका तेल मिला दो । फ़िर मूसा में रखकर बांस के कोंपलो की आग में तपाओ । ऐसा करने से पारा मर जाता है । और उसमें लक्ष वेधी गुण आ जाते हैं । अर्थात साधारण धातु के एक लाख भाग और ऐसे पारे का एक भाग हो । इसको खाने से भूख और नींद पर विजय प्राप्त हो जाती है ।


Foods for healthy eyes(स्वस्थ आंखों के लिए फूड्स)

Foods for healthy eyes


Red grapes.
Resveratrol, found in the skin of red grapes, is an antioxidant that promotes overall eye health. There are lots of kid-friendly ways to serve grapes: you can freeze them or cut them in half, add them to a smoothie and have fun playing with them in between mouthfuls.

 Salmon. 
Omega-3 essential fatty acids found in fatty fish such as salmon, sardines, mackerel and trout as well as organic egg yolks (which contain around twice the amount of Omega-3s as eggs from grain-fed factory chickens) are crucial for optimal development of both the retina and brain.

 Mangoes. 
One of the most important nutrients for eye health is lutein, a compound found in the coloured portion of fruits and vegetables. Lutein plays two important roles: it helps protect the eyes from UV rays and it’s a major component of the macula, a part of the eye involved in central vision. In addition to mangoes, lutein can be found in dark green leafy vegetables, broccoli, capsicum, egg yolks (organic if possible) carrots, sweet potato and rockmelon.

 Carrots. 
This kid-friendly veggie is rich in vitamin A, a nutrient that protects the health of the cornea (the transparent front part of the eye that covers the pupil). Vitamin A deficiency has been linked to night blindness and an increased risk of contracting pink eye. In addition to carrots, foods with good levels of vitamin A include liver, pate, spinach, sweet potato, parsley and pumpkin.

Water. 
Being adequately hydrated is important to ensure the tear ducts and eyes are frequently flushed of dust, dirt and any other irritants.

 Natural eyecare tips


 Homeopathic remedies are very gentle and effective for children’s eye problems – you can find them at your local health food store or pharmacy. The remedy staphysagria is used to treat styes. For pink eye, I use calc carb to help ease symptoms. And I love the homeopathic remedy silica for blocked tear ducts. (For additional ideas on how to treat styes, pink eye and blocked tear ducts, check out GP Ginni Mansberg’s article on toddler eye health.)

 For a DIY remedy for pink eye, use dried calendula, the herb eyebright, or fennel to make an infusion. These herbs all have anti-inflammatory and anti-bacterial actions. Mix one teaspoon of dried herb in 100ml of hot water and allow it to steep for five minutes. Once cool, take a cotton pad, soak it in the infusion and wipe from the inside corner of the eye to the outside corner,making sure you use a fresh cotton pad for each wipe.

If you are breastfeeding, you can use breastmilk to wipe your child’s eye because it has strong immune-boosting properties. This is beneficial for any type of eye problem.

 Playing games also supports holistic development of your toddler’s eyes. Some of my favourites are peek-a-boo, and stackable cups/blocks as well as hide and seek. From the age of four, there are exercises that strengthen the muscles of the eye.

 Find out how to encourage your little one to eat more fish

Wednesday, August 12, 2015

10 STEPS TOWARDS HEALTHY FEET(स्वस्थ पैर की दिशा में 10 कदम)


10 STEPS TOWARDSHEALTHY FEET



1.    MAKE SURE THAT YOU ATTEND YOUR ANNUAL FOOT REVIEW (For 12 years old +) where your bare feet will be examined by an appropriately trained person.
2.    KNOW YOUR RISK At the end of your annual foot review, you should be told your risk of developing foot problems and if you will be referred.

3.    ARE YOUR FEET AT INCREASED OR HIGH RISK? If so, make sure you been referred to a specialist for expert advice.
4.    CHECK YOUR FEET EVERY DAY for any signs of redness, pain, damage to the skin, swelling or build up of hard skin. Look for any changes in the shape of your feet.

      5.    BE AWARE OF ANY LOSS OF SENSATION IN YOUR FEET Don’t go barefoot and avoid                extremes of temperature if you think you have lost feeling in any part of your feet.

6.    TOUCH THE TOES TEST Ask a family member or friend to assess the feeling in your toes by doing a quick, easy test at home.
7.    LOOK AFTER YOUR TOENAILS Don’t cut down the sides of your nail as this could lead to ingrowing toenails. If you have any difficulty with your foot-care, ask to be put in touch with your local podiatrist (chiropodist). 
8.    AVOID USING CORN REMOVING PLASTERS OR BLADES of any kind as these may damage your skin.
9.    ALWAYS WEAR WELL-FITTING SHOES that protect and support your feet and whenever possible don’t wear shoes with bare feet.
10.  MAINTAIN GOOD GLUCOSE CONTROL Good glucose control can prevent foot problems in the future by keeping the nerves and blood vessels that serve the feet healthy. 

काया कल्प तेल :: मोटापा कम करे | मोटापा करे कम घर के नुस्खों

मोटापा नाशक कायाकल्प तेल, Obesity destructor rejuvenating oil :
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ये सभी सामग्री पंसारी की शॉप में मिल जाएगी |
हम बना कर कोई दवा नहीं बेचते है कृपया बार बार नहीं पूछे |
बाजार में बनी बनाई नहीं मिलती है , किसी वैध जी से तैयार करवा लेवे या अपने हाथ से बनाये |
पोस्ट में कमेंट्स देने से पहले पूरी पोस्ट २-३ बार जरुर पढ़े ,सब समझ में आ जायेगा |
** यह दिव्य चमत्कारिक तेल है । इससे बूढ़ा भी जवान जैसा हो जाता है ।स्त्री का बंध्यापन दूर होता है । मोटापा जड़ से नष्ट हो जाता है । कामशक्ति बढ़ जाती है । आयु बढ़ जाती है । रोगों से सुरक्षा होती है ।
** यह बेडौल शरीर को सुन्दर सुडौल कसा हुआ चिकना और कांतिवान बनाता है । इससे सभी प्रकार के दुर्गन्ध का नाश हो जाता है ।'

मोटापा करे कम घर के नुस्खों
तेल बनाने की विधि ::
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** चन्दन, खस, प्रियंगु, इलाइची , गोरोचन, लोबान, अगर, कस्तूरी, कपूर, जावित्री , जायफल, कंकोल, सुपारी, लौंग, नली, जटामासी, कूट-रेणुका , तगर, नागरमोथा, नविन नख, बोल, दौना, चोरक शैलेय ,एलुआ , सरल, सतवन , जाख, आँवला,लजौनी घास, पदमाख , धाय के फूल, पुंडरिक , कचूर, अपामार्ग का पंचांग , धतूरे के पत्ते – 10- 10 ग्राम (अलग – अलग कूटकर जौ कूट कर ले या कूटकर सिलबट्टे पर पिसे )
केसर - २ ग्राम डाले |
एक लीटर शुद्ध सरसों का तेल ।
4 लीटर पानी में घोंट कर 1 लीटर बेल के पत्तों का रस डाले । फिर घोंटे और आग पर धीमी आंच में गरम करके सब कुछ जला कर तेल रह जाने तक ठंडा करके निचोड़ कर छान लें ।
ये सभी दवा पंसारी की शॉप (जड़ी बूटी बेचने वाले ) पर मिल जाती है |
उपयोग – प्रतिदिन मालिश करके 1 घंटे बाद स्नान करे |
6 महीने प्रयोग करें । लाभ तो 15 दिन में नजर आने लगता है ।

गुड़हल फूल में छिपा है सेहत का खजाना (Hibiscus flower hidden treasure of health)


गुड़हल फूल में छिपा है सेहत का खजाना ::



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आयुर्वेद के अनुसार सफेद गुड़हल की जड़ों को पीस कर कई दवाएं बनाई जाती हैं। 
1. गुडहल से बनी चाय को प्रयोग सर्दी-जुखाम और बुखार आदि को ठीक करने के लिये प्रयोग की जाती है।
2. गुड़हल के फूल का अर्क दिल के लिए उतना ही फायदेमंद है जितना रेड वाइन और चाय।3. – डायटिंग करने वाले या गुर्दे की समस्याओं से पीडित बिना चीनी मिलाए पीये , क्योंकि इसमें प्राकृतिक मूत्रवर्धक गुण होते हैं।
5. – अगर गुडहल को गरम पानी के साथ या फिर उबाल कर फिर हर्बल टी के जैसे पिया जाए तो यह हाई ब्लड प्रेशर को कम करेगा और बढे कोलेस्ट्रॉल को घटाएगा क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट होता है।
6. गुडहल का फूल काफी पौष्टिक होता है क्योंकि इसमें विटामिन सी, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट होता है। यह पौष्टिक तत्व सांस संबन्धी तकलीफों को दूर करते हैं। यहां तक की गले के दर्द को और कफ को भी हर्बल टी सही कर देती है।
7. – गुडहल के फूलों का असर बालों को स्वस्थ्य बनाने के लिये भी होता है। इसे पानी में उबाला जाता है और फिर लगाया जाता है जिससे बालों का झड़ना रुक जाता है। यह एक आयुर्वेद उपचार है। इसका प्रयोग केश तेल बनाने मे भी किया जाता है।
8. – गुडहल के पत्ते तथा फूलों को सुखाकर पीस लें। इस पावडर की एक चम्मच मात्रा को एक चम्मच मिश्री के साथ पानी से लेते रहने से स्मरण शक्ति तथा स्नायुविक शक्ति बढाती है।
9. – गुडहल के फूलों को सुखाकर बनाया गया पावडर दूध के साथ एक एक चम्मच लेते रहने से रक्त की कमी दूर होती है |
10. – यदि चेहरे पर बहुत मुंहसे हो गए हैं तो लाल गुडहल की पत्तियों को पानी में उबाल कर पीस लें और उसमें शहद मिला कर त्वचा पर लगाए |

महिलाओं में खमीर का संक्रमण ठीक करने की विधि :: (yeast infection)

महिलाओं में खमीर का संक्रमण ठीक करने की विधि :: (yeast infection)

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खमीर का संक्रमण जो कि आमतौर पर योनि के भागों में होता है,दांतों,नाखूनों,त्वचा के मोड़ों पर,पेट के निचले हिस्सों पर तथा स्तनों के नीचे भी पाया जाता है। इसके होने का मुख्य कारण तनाव,कोई दीर्घकालिक बीमारी,गर्भावस्था,मधुमेह,एंटीबायोटिक्स का प्रयोग,स्टेरॉयड्स का प्रयोग आदि होता है।


करौंदा

खमीर के फंगस को कम करने के लिए करौंदे का सेवन करें जिसमें महत्वपूर्ण एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण होते हैं।करौंदे उन संक्रमणों का भी इलाज करते हैं जो मूत्रमार्ग एवं मूत्राशय के द्वारा शरीर में प्रवेश करते हैं। करौंदे का रस पियें। अगर ये संभव नहीं होता तो रोज़ २ से ३ करौंदे की गोलियां खाएं। करौंदे के घाव जल्दी ठीक करने की शक्ति से खमीर के संक्रमण के निशान कुछ ही समय में दूर हो जाएंगे।

दही

दही भी खमीर के संक्रमण को ठीक करने का एक आसान घरेलू नुस्खा है। प्रभावित भाग पर सादी दही लगाएं और अच्छे परिणामों के लिए १ घंटे के बाद धो दें। आप इसे खा भी सकते हैं पर ध्यान रखें कि दही मिठास से मुक्त और सादी हो। लैक्टोबैसिलस एसिडोफिलस, जो कि दही में मौजूद एक बैक्टीरिया होता है ,संक्रमण को कम करता है।

टी ट्री आयल

खमीर के संक्रमण को आसानी से ठीक करने के लिए टी ट्री आयल का प्रयोग करें। टी ट्री आयल में मौजूद एंटी फंगल गुण खमीर के संक्रमण से जुडी समस्याओं को समाप्त करते हैं। थोड़ा सा टी ट्री आयल लें और इसे पानी या मीठे बादाम के तेल या जैतून के तेल के साथ मिलाएं। इस मिश्रण को सूती के गोले की सहायता से प्रभावित क्षेत्रों में दिन में कई बार लगाएं। अगर आप योनि में खमीर के संक्रमण की समस्या से परेशान हैं तो रुई के फाहे में थोड़ा सा टी ट्री आयल लगाएं और इसे अपनी योनि में २ से ३ घंटों तक दबाकर रखें। संक्रमण से बचने के लिए इस विधि को दिन में २ बार प्रयोग में लाएं। यह गर्भवती महिलाओं के लिए अच्छा उपाय नहीं है क्योंकि टी ट्री आयल नवजात शिशु को हानि पहुंचा सकता है।

सिरका

सिरके की मदद से भी आप खमीर के संक्रमण को ठीक कर सकते हैं। सिरके में मौजूद ख़ास तत्व संक्रमण के लिए ज़िम्मेदार फंगस का बढ़ना रोकते हैं। अपने नहाने के पानी के टब में सिरके की कुछ बूँदें डालकर अच्छे से हिलाएं। अब इसमें अपने शरीर को आधे घंटे तक अच्छे से भिगोएं। इस प्रकार नहाने से जलन कम होती है तथा संक्रमण के फलस्वरूप त्वचा में होने वाली खुजली से राहत मिलती है। आप सेब के सिरके या सामान्य सिरके को पानी के साथ मिलाकर प्रभावित भागों पर लगा भी सकते हैं। इसे ३० मिनट तक छोड़ दें और त्वचा को राहत देने के लिए अच्छे से धो लें।

बोरिक एसिड

बोरिक एसिड का कैप्सूल के रूप में लेने से या फिर बोरिक एसिड को पानी में मिलाकर प्रभावित जगहों पर लगाने से संक्रकमांण की समस्या से राहत मिलती है। इसमें मौजूद एंटीसेप्टिक,एंटी वायरल और एंटी फंगल गुण आपकी संक्रमित त्वचा को तेज़ी से ठीक करते हैं।

नोट ::--

बोरिक एसिड गर्भवती महिलाओं के लिए सही नहीं है और इसे लम्बे समय तक प्रयोग में लाना भी खतरनाक है क्योंकि यह एक तरह का ज़हरीला पदार्थ होता है।

Uses and Benefits of Tulsi (Tulsi ke fayde. (Benefits of Tulsi, Tulasi))– Swasthya ke Liye Vardaan

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तुलसी के कईनामहैंजोइसकेगुणोंकाइतिहासबतातेहैं।वेदों, औषधि-विज्ञान के ग्रंथों औरपुराणों मेंइसकेकुछप्रमुखनाम-गुण इस प्रकारहैं-

* कायस्था--क्योंकि यहकायाकोस्थिररखतीहै।
* तीव्रा--क्योंकि यह तीव्रता सेअसरकरतीहै।* देव-दुन्दुभि--इसमें देव-गुणोंकानिवासहोताहै।* दैत्यघि- -रोग-रूपी दैत्यों कासंहारकरतीहै।* पावनी- -मन, वाणीऔरकर्मसेपवित्रकरतीहै।* पूतपत्री- -इसकेपत्र(पत्ते) पूत(पवित्र) करदेतेहैं।* सरला-- हरकोईआसानीसेप्राप्त करसकताहै।* सुभगा- -महिलाओं केयौनांगनिर्मल-पुष्ट बनाती है।* सुरसा-- यहअपनेरस(लालारस) सेग्रन्थियों कोसचेतनकरतीहै।
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2 रक्त-विकार शान्त करतीहै।
3 त्वचाऔरछूतकेरोगनहींहोनेदेती।
4 तुलसीकीकंठीमालाकंठरोगोंसेबचातीहै।
5 कामोत्तेजना नहींहोनेदेती, नपुंसकभीनहींबनाती।
6 तुलसी-दल चबाने वालेकेदांतोंकोकीड़ानहींलगता।
7 तुलसीकेसेवककोक्रोधकमआताहै।
8 तुलसीकीमाला, कंठी, गजराऔरकरधनीपहननाशरीरकोनिर्मल, रोगमुक्त औरसात्विक बनाताहै।
9 कार्तिक महीनेमेंजोतुलसीकासेवनकरताहै, उसेसालभरतकडॉक्टर-वैद्य, हकीम केपासजानेकीजरूरतनहींपड़तीं।
10 तुलसीकोअंधेरेमेंतोड़नेसेशरीरमेंविकारसकतेहैंक्योंकि अंधकारमेंइसकीविद्युत लहरेंप्रखरहोजातीहैं।
11 तुलसीकासेवनकरनेकेबाददूधपीएं।इससेचर्म-रोग हो सकतेहैं।
12 कार्तिक महीनेमेंयदितुलसी-दल या तुलसी-रस ले चुकेंहोंतोउसकेबादपानखाएं।येदोनोंगर्महैंऔरकार्तिक मेंरक्त-संचार भी प्रबलता सेहोताहै, इसलिएतुलसीकेबादपानखानेसेपरेशानी मेंपड़सकतेहैं।
13 तुलसी-दल के जलसेस्नानकरकेकोढ़नहींहोता।
14 सूर्य-चन्द्र ग्रहण केदौरानअन्न-सब्जी में तुलसी-दल इसलिए रखाजाताहैकिसौरमण्डल कीविनाशकगैसोंसेखाद्यान्न दूषितहो।
15 जीरेकेस्थानपरपुलावआदिमेंतुलसीरसकेछींटेदेनेसेपौष्टिकता औरमहकमेंदसगुनावृद्धिहोजातीहै।
16 तेजपातकीजगहशाक-सब्जी आदि मेंतुलसी-दल डालने सेमुखड़ेपरआभा, आंखोंमेंरोशनीऔरवाणीमेंतेजस्विता आतीहै।
17 तेल, साबुन, क्रीमऔरउबटनमेंतुलसी, दलऔरतुलसीरसकाउपयोग, तन-बदन को निरोग, सुवासित, चैतन्यऔरकांतिमय बनाताहै।
18 स्वभावमेंसात्विकता लानेवालाकेवलयहीपौधाहै।
19 तुलसीकेवलशाखा-पत्तों का ढेरनहीं, आध्यात्मिक शक्तिकाप्रतीकहै।
20 तुलसीकेआगेखड़ेहोकरपढ़ने, विचारने दीपजलानेऔरपौधेकीपरिक्रमा करनेसेदसोंइन्द्रियों केविकारदूरहोकरमानसिकचेतनामिलतीहै।
सामान्य ज्वर:-
गर्मीयाधूपमेंअधिकघूमना, थकावट, पेटमेंदर्द, सर्दी-गर्मी के प्रभावसेयहरोगहोसकताहै।
* दोग्रामतुलसीपत्ते, दोग्रामअजवायनपीसकरपचासग्रामपानीमेंघोलकरपिलादें।सुबह-शाम पिलाएं।
मौसमीबुखार, बदहजमी, पेटकेविकार, कब्जलूलगनेआदिविकारों सेग्रस्तरोगियों काखूनजबमच्छरों द्वाराफैलताहैतोअच्छे-अच्छों को चारपाईपरपटकदेताहै।इसीकोमलेरिया कहतेहैं।


यदि
जुकामकेसाथबुखारभीहोतोचायकेअलावातुलसीकेपत्तोंकारसनिकालकर उसमेंशहदमिलाकरदिनमेंचारबारसेवनकरें।जुकामकेकारणहोनेवालाज्वरशान्तहोजाएगा।

शोभा, सुगन्धि औरपवित्रता कीप्रतीकहैये---
तुलसी का पौधाजिसआंगनमेंलहलहाता है, उसकीशोभाऔरसुगन्धि मेंपवित्रता होतीहै।महिलाएं अपनाचरित्रतुलसी-जैसा बनाने मेंहीअपनाजीवनसार्थकमानतीहैं।
इसीलिए विनम्र भावसेवेकहतीहैं- ‘‘मैंतुलसीतेरेआंगनकी।’’
तुलसी का माहात्म्य:--
1 यहमनमेंबुरेविचारनहींआनेदेती।
* बुखारकाहमलामनुष्यपरकभीभीहोसकताहै।मौसमबदलनाशुरूहुआनहींकिबुखारनेघेरा।मच्छरों काआक्रमणभीमलेरिया जैसेजानलेवा बुखारकोआमिन्त्रत करदेताहै।ऐसेमेंआवश्यकता होतीहैउचितइलाजऔरसटीकजानकारी की, जोइसअध्यायमेंदीजारहीहै।
* इसमेंशरीरकातापमान102-103 डिग्रीहोजाताहै।बेचैनी, शरीरमेंदर्द, प्यासकाअधिकलगना, सिर-हाथ-पैरों मेंपीड़ा।
उपचार:-
* दसतुलसीकेपत्ते, बीसकालीमिर्च, पांचलौंग, थोड़ी-सी सोंठ पीसकरढाईसौमिलीलीटर पानीमेंउबाललेंऔरशक्करमिलाकररोगीकोपिलादें।अगररोगीकोज्वरकेकारणघबराहटमहसूसहोतीहोतोतुलसीकेरसमेंशक्करडालकरशरबतबनालेंऔररोगीकोपिलादें।शीघ्रआराममिलताहै।
मौसमी बुखार:-
* बरसातयामौसमबदलनेसेरक्तसंचारपरभला-बुरा असर पड़ताहीहैऔरज्वरकेरूपमेंहमारेअंदरघंटीबजादेताहै।
उपचार:-
* तुलसीकीदसग्रामजड़लेकरपानीमेंउबालिएऔरपीजाइएदो-तीन दिन सुबह-शाम इस उपचारसेरक्त-साफ स्वच्छ होजाएगा।
पुराना बुखार:-
* पुरानाबुखारहोतोफेफड़ेकमजोरहोनेलगतेहैं, खांसीउठतीरहतीहै, छातीमेंदर्दभीहोताहै।
उपचार:-
तुलसी रस मेंमिश्रीघोलकरतीन-तीन घंटे बादतीनदिनतकपिलाए।ज्वरभीउतरजाएगाऔरखांसीदर्दभीजातेरहेंगे।
सर्दी बुखार:-
उपचार:-
* पांचतुलसी-दल और पांचकालीमिर्चपानीमेंपीसकरपिलाएं। तुलसी-मिर्च का वहचूर्णढाईसौग्रामपानीमेंउबालकरपिलानेसेतुरन्तअसरहोताहै।आधे-आधे घंटे बाददोबडे़चम्मचपिलातेरहनेसेनिश्चित लाभहोताहै।
खांसी बुखार:-
उपचार:-
* दसग्रामतुलसी-रस, बीस ग्रामशहदऔरपांचग्रामअदरककारसमिलाकरएकबड़ाचम्मचभरकरपिलादें।अद्भुतयोगहै, आजमाकरदेखलें।
* ग्यारहपत्तेतुलसीऔरग्यारहदानेकालीमिर्च, दोनोंकोपानीमेंपीसकरछानलें।इधरआगपरमिट्टीकाखालीसकोरापकाकरलालकरदेंऔरउसमेंतुलसीकालीमिर्चकाघोलछौंकदें।यहघोलगुनगुना रहजानेपरकालानमकमिलाकरपिलादें।खांसीबुखारसमूलनिकलभागेंगे।
मलेरिया:-
* इसकेलक्षणहैं-ठंड लगकर बुखारआना, कंपकपीलगना, शरीरमेंदर्द, घबराहट, भोजनमेंअरुचि, आंखोंमेंलाली, मुंहसूखजाना। 
उपचार:-
* तुलसीकारस, मंजरी, तुलसी-माला, तुलसी केपौधेऔरतुलसी-बीज मलेरिया कोकाटकरफेंकदेतेहैं।तुलसी-रस दस ग्रामऔरपिसीकालीमिर्चएकग्राममिलाकररोगीकोदिनमेंपांच-छह बार दो-दो घंटे बादपिलातेरहें।परेशानी सेबचनाचाहेंतोतुलसीकेदोसौग्रामरसमेंसौग्रामकालीमिर्चमिलाकररखदें।सुबह-दोपहर-शाम एक-एक चम्मच पिलाएं।
पुराना मलेरिया:-
उपचार:-
* साततुलसी-दल और सातकालीमिर्चदोनोंदाढ़केनीचेरखकरचूसतेरहेंदिनमेंतीन-चार बार यहीप्रक्रिया दोहराने सेमहीनोंपुरानामलेरिया भीभागजाएगा।
लगातार बुखार रहना:-
उपचार:-
* जलकुम्भी केफूल, कालीमिर्चऔरतुलसी-दल, तीनों समानमात्रामेंलेकरकाढ़ाबनालेंऔरप्रातः-सायं पिलाएं।
* तुलसी-दल दस ग्रामलेकरपांचदानेकालीमिर्चकेसाथघोटलेंऔरदिनमेंतीनबारसेवनकराएं।आन्तरिक सफाईहोतेहीबुखारकानामोनिशान भीनहींरहेगा।
सन्निपात:-
उपचार:-
* ज्वरइतनेजोरकाबढ़जाएकिआदमीबड़बड़ाने लगे, ऐसीस्थितिमेंतुलसी, बेल(बिल्व) औरपीपलकेपत्तोंकाकाढ़ाउबालें। जबपानीढाई-तीन सौ ग्रामबचजाएतोशीशीमेंभरलें।दस-दस ग्राम दो-दो घंटे बादरोगीकापिलातेरहें।निश्चित हीलाभहोगा।
लू लगना:-
उपचार:-
* एकचम्मचतुलसी-रस में देशीशक्करमिलाकरएक-एक घंटे बाददेतेरहें।यहसमझेंकितुलसी-रस गर्म होनेसेहानिपहुंचाएगा। संजीवनी शक्तिजिसकन्दमूल मेंभीहोगी, वहगर्महीहोगा।आरामआनेकेबादभीधूपमेंनिकलनाहोतोतुलसीरसमेंनमकमिलाकरपीएंइससेलूलगनेकीआशंकाहीनहींरहेगी।प्यासभीकमलगेगीऔरचक्करभीनहींआएंगे।
टूटा-टूटा बदन:-
* उपचार-तुलसी दल कीचायबनाकरपीएंआपकेबदनमेंताजगीकीलहरेंदौड़नेलगेंगी। घरमेंअगरचायकीपत्तीकीजगहतुलसीदलसुखाकररखलेंतोकफ, सर्दी, जुकाम, थकानऔरबुखारयासिर-दर्द पास भीनहींफटकेंगे।
श्वसन संस्थान केरोग:-
* प्रदूषण केसाथहीदिनचर्या खानपानकाअव्यवस्थित होनामुख्यरूपसेफेफड़ों सेसंबंधित रोगोंकेकारणहै।बिनाकिसीपूर्वयोजनाकेबनेफ्लैट्स औरमकानोंमेंखुलीहवाकेहोनेसेभीफेफड़ेरोगग्रस्त होतेहैं।
जुकाम:-
* इसकेलक्षणहैं: नाकमेंखुश्कीयाश्लेष्मा अधिकबहना, खांसीकेसाथकफकानिकलना, कानबंदहोजाना, छींकआना, आंखोंसेपानीआना, सिरदर्द। यहऋतुकेबदलने, अत्यधिक ठण्डेपेयपदार्थों केप्रयोग, पानीमेंभीगने, अत्यधिक मदिरापान, धूम्रपान तम्बाकू-गुटखेकासेवनकरनेसेहोजाताहै।
उपचार:-
* छोटीइलायचीकेकुलदोदानेऔरएकग्रामतुलसीबौर(मंजरी) डालकरकाढ़ाबनाएंऔरचायकीतरहदूध-चीनी डालकर पिलादें।दिनमेंचार-पांच बार भीपिलादेंगेतोखुश्कीनहींकरेगी, मगरसर्दी-जुकाम को जड़सेहीगायबकरदेगी।
* तुलसीकेपत्तेछःग्रामसोंठऔरछोटीइलायचीछः-छः ग्राम, दालचीनी एकग्रामपीसकरचायकीतरहउबाललें।थोड़ी-सी शक्कर डाललें।दिनमेंइसचायकाचारबारबनाकरपीएं।कुछखाएंनहींजुकामकैसाभीहोठीकहोजाएगा।

* दालचीनीं, सोंठऔरछोटीइलायची, कुलएकग्राम, तुलसी-दल, छह ग्राम, इन्हेंपीसकरचायबनाएंऔरपीएं।दिनमेंऐसीचायचारबारभीलेसकतेहैं।उसरातपेटभरकरखानाखाएं।अगलीसुबहआरामजाएगा।
शीघ्र पतन एवंवीर्यकीकमी:-
* तुलसीकेबीज5 ग्रामरोजानारातकोगर्मदूधकेसाथलेनेसेसमस्यादूरहोतीहै
नपुंसकता:--
* तुलसीकेबीज5 ग्रामरोजानारातकोगर्मदूधकेसाथलेनेसेनपुंसकता दूरहोतीहैऔरयौन-शक्ति में बढोतरिहोतीहै।
मासिक धर्म मेंअनियमियता:-
* जिसदिनमासिकआएउसदिनसेजबतकमासिकरहेउसदिनतकतुलसीकेबीज5-5 ग्रामसुबहऔरशामपानीयादूधकेसाथलेनेसेमासिककीसमस्याठीकहोतीहैऔरजिनमहिलाओकोगर्भधारण मेंसमस्याहैवोभीठीकहोतीहै
* तुलसी के पत्ते गर्म तासीर के होते है पर सब्जा शीतल होता है . इसे फालूदा में इस्तेमाल किया जाता है . इसे भिगाने से यह जेली की तरह फुल जाता है . इसे हम दूध या लस्सी के साथ थोड़ी देशी गुलाब की पंखुड़ियां दाल कर ले तो गर्मी में बहुत ठंडक देता है .इसके अलावा यह पाचन सम्बन्धी गड़बड़ी को भी दूर करता है .यह पित्त घटाता है ये त्रीदोषनाशक , क्षुधावर्धक है