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Wednesday, August 12, 2015

काया कल्प तेल :: मोटापा कम करे | मोटापा करे कम घर के नुस्खों

मोटापा नाशक कायाकल्प तेल, Obesity destructor rejuvenating oil :
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ये सभी सामग्री पंसारी की शॉप में मिल जाएगी |
हम बना कर कोई दवा नहीं बेचते है कृपया बार बार नहीं पूछे |
बाजार में बनी बनाई नहीं मिलती है , किसी वैध जी से तैयार करवा लेवे या अपने हाथ से बनाये |
पोस्ट में कमेंट्स देने से पहले पूरी पोस्ट २-३ बार जरुर पढ़े ,सब समझ में आ जायेगा |
** यह दिव्य चमत्कारिक तेल है । इससे बूढ़ा भी जवान जैसा हो जाता है ।स्त्री का बंध्यापन दूर होता है । मोटापा जड़ से नष्ट हो जाता है । कामशक्ति बढ़ जाती है । आयु बढ़ जाती है । रोगों से सुरक्षा होती है ।
** यह बेडौल शरीर को सुन्दर सुडौल कसा हुआ चिकना और कांतिवान बनाता है । इससे सभी प्रकार के दुर्गन्ध का नाश हो जाता है ।'

मोटापा करे कम घर के नुस्खों
तेल बनाने की विधि ::
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** चन्दन, खस, प्रियंगु, इलाइची , गोरोचन, लोबान, अगर, कस्तूरी, कपूर, जावित्री , जायफल, कंकोल, सुपारी, लौंग, नली, जटामासी, कूट-रेणुका , तगर, नागरमोथा, नविन नख, बोल, दौना, चोरक शैलेय ,एलुआ , सरल, सतवन , जाख, आँवला,लजौनी घास, पदमाख , धाय के फूल, पुंडरिक , कचूर, अपामार्ग का पंचांग , धतूरे के पत्ते – 10- 10 ग्राम (अलग – अलग कूटकर जौ कूट कर ले या कूटकर सिलबट्टे पर पिसे )
केसर - २ ग्राम डाले |
एक लीटर शुद्ध सरसों का तेल ।
4 लीटर पानी में घोंट कर 1 लीटर बेल के पत्तों का रस डाले । फिर घोंटे और आग पर धीमी आंच में गरम करके सब कुछ जला कर तेल रह जाने तक ठंडा करके निचोड़ कर छान लें ।
ये सभी दवा पंसारी की शॉप (जड़ी बूटी बेचने वाले ) पर मिल जाती है |
उपयोग – प्रतिदिन मालिश करके 1 घंटे बाद स्नान करे |
6 महीने प्रयोग करें । लाभ तो 15 दिन में नजर आने लगता है ।

चेस्ट बनाने के तरीके / उपाय | Breast growth tips in Hindi

चेस्ट बनाने के तरीके / उपाय ::
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मुख्य उपायों में से एक उपाय हैं वजन बढ़ाना. जब आपका वजन बढ़ता हैं तो धीरे धीरे आपके स्तनों का आकर भी बढ़ता हैं . वजन बढ़ने के लिए आप मूंगफली, चीज़, मक्खन, दही, नाशपाती और दुसरे स्वास्थ्यकर भोज्य पदार्थ खा सकते हैं.


अपने अग्र भाग को ज़मीन से सटाकर और हाथों को ज़मीन पर समतल रखकर पैरो को फर्श पर सीधा रखे और हथेली की सहायता से स्वयं को ऊपर उठाइए और धीरे धीरे निचे लाइए. यह प्रकिया कम से कम १३ से १५ बार दोहराए और आप अपने हाथों और छाती को मज़बूत और स्वस्थ महसूस करेंगे. कुँए से पानी खींचना भी छाती की मांसपेशियों के खिंचाव में मदद कर सकता है, जिससे आपके स्तन तेज़ी से बढ़ेंगे.
. कुर्सी के बीचो बिच बैठ जाइये और अपनों भुजाओ से समान वजन उठाइए. अपने हाथो वजन सहित सीधा कंधे के स्तर तक उठाइए और धीरे से निचे लाइए, ध्यान रखिये के आपके हाथ आपस में पास होने चाहिए. और आपके निचले शरीर के तरफ हाथो का मुख होना चाहिए. यह व्यायाम एक दिन में १२ बार और ३ सेट में करे. आप रात में ब्रा का उपयोग टाल सकती है.
अपने स्तनों की प्रतिदिन या हर रात ओलिव आयल से मालिश कीजिये, 
फल और सब्जियां – इनमें अस्ट्रोजन अधिक पाया जाता है. खजूर, चेरी, सेब और आलूबुखारा प्रतिदिन खाने के साथ खाना चाहिए.
मेथी- यह स्तन वृद्धि के लिए सिद्ध तथा उत्तम जड़ी है. इसलिए ऐसा भोजन करने की कोशिश कीजिये जिसमे मेथी का घटक हो. मेथी की पत्तियां दूध में भी वृद्धि करती हैं.
सोयाबीन- सोया उत्पाद जैसे सोया दूध, सोया मक्खन, सोया कॉफ़ी, सोया ब्रेड आदि में अस्ट्रोजन का स्तर उच्च होता है. स्तन वृद्धि में ये सोया उत्पाद अच्छा परिणाम देंगे.
जवस बीज- ये स्तन वृद्धि में बहुत प्रभावकारी पाए गए हैं. आप बहुत सारे दुसरे बीज भी स्तन वृद्धि में उपयोग कर सकते हैं जैसे पपीते के बीज, सौंफ के बीज, सूरजमुखी के बीज इत्यादि.
मटर और फलियाँ- आप मटर और फलियों से प्राकृतिक अस्ट्रोजन प्राप्त कर सकते हैं. राजमा, लाल राजमा, लिमा बीन्स, छोले और अम्जोद, प्रोटीन भोज्य पदार्थों के साथ खाया जाना चाहिए जो स्तन वृद्धि में मददगार होता है.
जैतून- जैतून और जैतून का तेल स्तन वृद्धि का सर्वोत्तम उपचार हैं. वर्जिन जैतून का तेल और कला जैतून स्तन वृद्धि के लिए सर्वोत्तम हैं. आप स्तन वृद्धि के लिए दूसरे तेल भी उपयोग कर सकते हैं जैसे कच्चे अखरोट का तेल, अलसी का तेल, अवोकेडो तेल और तिल का तेल.
हमेशा धीरज रखिये, स्तनों का आकार धीरे-धीरे बढ़ेगा और यह आपको जल्दी ही पता चल जाएगा. ख़ास तौर पर तब जब आप यौवन आरम्भ से गुज़र रहे हों, स्तनों के आकार वृद्धि में कुछ समय लगेगा.

बार बार स्तनों की मालिश कीजिये, इससे स्तनों का आकार बढ़ता है और स्तन आकर्षक बनते हैं.
सॉफ्ट ड्रिंक, चाय, कॉफ़ी, शराब आदि का उपभोग टालिए, इससे स्तन वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
जंक फ़ूड मत खाइए. यह स्तन वृद्धि पर असर डालता है.
बहुत सारा पानी पीजिये और नियमित रूप से कसरत कीजिये.

मृगनाभ्यादि वटी जडी-बूटियाँ :: Mrignabyadi equit

मृगनाभ्यादि वटी::
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शीतकाल में शरीर को पोषण और शक्ति प्रदान करने के लिए सेवन योग्य एक उत्तम वाजीकारक योग है। विवाहित स्त्री-पुरुषों को इस योग का सेवन कर लाभ उठाना चाहिए।

सामग्री -- कस्तूरी 1 ग्राम, केसर 2 ग्राम, छोटी इलायची के दाने 5 ग्राम, जायफल 6 ग्राम, बंसलोचन 7 ग्राम, जावित्री 8 ग्राम, सोने के वर्क 1 ग्राम और चाँदी के वर्क 3 ग्राम, मुक्ता पिष्टी 4 ग्राम
निर्माण विधि- कस्तूरी, केसर, सोने, चाँदी के वर्क और मुक्ता पिष्टी अलग रखकर शेष सब द्रव्यों को खूब कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर लें और कस्तूरी-केसर आदि द्रव्यों को अलग खरल में घोंटकर यह चूर्ण डालकर नागर पान का रस छिड़कते हुए घुटाई करें। छाया में सुखाकर शीशी में भर लें।
मात्रा और सेवन विधि- एक या दो गोली सुबह-शाम एक गिलास मीठे दूध या थोड़ी मलाई के साथ लेवे |


उपयोग-
इस योग का उपयोग सामान्य स्वस्थ व्यक्ति भी कर सकता है यौन विकारों को नष्ट करने के लिए यह योग अति उत्तम है। वीर्यस्राव (धात जाना), स्वप्नदोष, धातुक्षीणता, शीघ्रपतन, ध्वजभंग (नपुंसकता) जैसे दोष दूर कर यौनशक्ति बढ़ाने के अलावा प्रमेह, क्षय, श्वास रोग तथा मंदाग्नि दूर कर शारीरिक बल, बुद्धिबल, स्मरणशक्ति और वीर्य की वृद्धि करने वाला यह योग शरीर को निरोग रखता है और आयु की वृद्धि करता है।

मृगनाभ्यादि वटी रक्तवाहिनी और वातवाहिनी दोनों नाड़ियों पर प्रभाव कर लाभ पहुँचाती है। इस वटी में शीतवीर्य द्रव्यों की प्रधानता होने से उष्ण प्रकृति के स्त्री-पुरुष ग्रीष्म ऋतु में भी इस योग का सेवन निर्भयतापूर्वक कर सकते हैं।
सुजाक, उपदंश या पित्त प्रकोप के कारण पीले रंग का पेशाब बार-बार और थोड़ी-थोड़ी मात्रा में होना, आँखों में जलन, सिर में भारीपन, चक्कर आना, तन्द्रा व आलस्य बना रहना, पाचनशक्ति की कमी और चेहरे की निस्तेजता आदि दोष पूर करने में बहुत लाभप्रद है।
स्त्री वर्ग- इस वटी के सेवन से गर्भाशय और प्रजनन प्रक्रिया संस्थान को बल मिलता है, शरीर पुष्ट और सुडौल बनता है, चेहरा तेजस्वी और दमदमाता हुआ रहता है और शरीर में जल्दी थकावट नहीं आती। 
यदि स्त्री शिशु को दूध पिलाती हो तो शिशु भी इस योग के गुण लाभ से लाभान्वित होगा, इसलिए नवप्रसूता महिलाओं को 2-3 माह इस योग का प्रयोग करना चाहिए। 
प्रौढ़ आयु की तरफ बढ़ रही महिलाएँ यदि इस वटी का सेवन करें तो प्रौढ़ता के लक्षण दूर होंगे, उनका शरीर देर तक युवा बना रहेगा और चेहरा कान्तिपूर्ण बना रहेगा।


मानसिक तनाव, अवसाद या आघात से उत्पन्न मानसिक दुर्बलता, मादक द्रव्यों के सेवन से उत्पन्न निर्बलता, निद्रानाश, स्मरणशक्ति की कमी, मन में कुविचार और आशंका का भाव आना, उदासीनता, अरुचि, उच्चाटन और मलावरोध होना आदि दोष दूर करने के लिए इस योग का प्रयोग करना अति उत्तम है। 
इसी नाम से बाजार में दवा की दुकानों पर मिलता है।