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Saturday, February 21, 2015

वायु मुद्रा(Vayu Mudra)

वायु मुद्रा: तर्जनी अंगुली को अंगुष्टो के मूल में लगाकर अंगूठे को हल्का दबाकर रखने से यह वायु मुद्रा बनती है (तर्जनी अंगुली को अंगुष्टो से दबाकर भी ये मुद्रा बनती है)शेष तीनो अंगुलियों को सीधा रखनी चाहिए। 











लाभ: इसके अभ्यास से समस्त प्रकार के वायु सम्बन्धी रोग - गठिया,संधिवात,आर्थराइटिस,पक्षाघात,कंपवात,साइटका,घुटने के दर्द तथा गैस (Rheumatism, gout, arthritis, paralysis, Kanpwat, Saitka, knee pain and gas) बनना आदि रोग दूर होते है ,गर्दन एवं रीढ़ के दर्द में लाभ मिलता है। 

Saturday, January 10, 2015

Yoga for gastric troubles



        गैस (Gastric) सभी रोगियों की तुलना में आज करीब आधे से अधिक रोगो में देखा जाता है। गैस्ट्रिक परेशानियों की वजह मुख्य रूप से अनुचित पाचन, तनाव, दोषपूर्ण खानपान की आदतों, धूम्रपान आदि मुख्य रूप से होता है। अम्लता (Acidity) गैस परेशानी के लिए जिम्मेदार देखा जाता है। 
      प्राणायाम या श्वास व्यायाम का अभ्यास शुरू में ही जरुरी है।  फेफड़ों की क्षमता में सुधार लाने के अलावा इस अभ्यास को आसानी से शरीर के सभी ऊतकों को ऑक्सीजन की आपूर्ति को पूरा करते है । 
     इस प्रकार यह पाचन तंत्र सहित सभी प्रणालियों के समुचित कार्य के लिए सक्षम बनाता है। ध्यान (Maditation) अभी तक गैस मुसीबत या इससे संबंधित अन्य लक्षण में लाभदायी है ,जो एक और अभ्यास है। ३० मिनिट तक हर रोज अभ्यास करे ,अनुभवी योग गुरु से सीखा जाना चाहिए।
        गैस्ट्रिक  रोग के लिए उपयोगी मुख्य आसन, सेतुबंध (Setubandh),सर्वांगासन (Sarvangasan),पश्चिमोत्तनासन(paschimottanasana),अपानआसन (Apanasana) ,Marjaryasana शामिल है।




अपानआसन (Apanasana)


         अपने पीठ पर लेट जाये। अपने घुटनो को और पैरो को सीने  की और मोड़े। अपने हाथो को पेरो की मध्यमा पिंडली को पकडे। अपने सिर और कंधे को जमीन पर टिका कर रखे। अपने सर के निचे  कंबल या तकिया रख सकते है। गहरी सांस ले। अपनी सांस में कम  से कम एक या दो मिनिट के लिए आसन करे।
       अच्छा परिणाम  के लिए लगातार अभ्यास करना जरुरी है।


 
   लाभ:
          गैस्ट्रिक प्रॉब्लम के लिए लाभदायी है और अम्लता (Acidity) के लिए उपयोगी है।


मार्जरासन (Marjrasana)

विधिः 
१.      दोनों हाथों की हथेलियों एवं घुटनों को भूमि पर टिकाते हुए स्थिति लीजिये। 




      





२.      अब श्वास अन्दर भरकर छाती और सिर को ऊपर उठाये ,कमर निचे की ओर झुकी हुई हो। थोड़ी देर इस स्थिति में रहकर श्वास बाहर छोड़ते हुए पीठ को ऊपर उठाये तथा सर को निचे झुकायें। 



 लाभ:
       कटी पीड़ा ओर गैस ,कब्ज एवं फेफड़ो को मजबूत करता है और गर्भाशय को बाहर निकलने जैसो रोगो को दूर करता है। 


सेतुबन्ध आसन(Setubandh Asan)


१.     सीधे लेट जाइए। दोनों घुटनों को मोड़कर रखिए।  कटिप्रदेश को ऊपर उठाकर दोनों हाथों को कोहनी के बल खड़े करके कमर के निचे लगाइए। 
२.     अब कटी को ऊपर स्थिर रखते हुए पैरो को सीधा कीजिए। कंधे एवं सर भूमि पर ठीके रहें। 




३.     वापस आते समय नितम्ब एवं पैरो को धीरे-धीरे जमीं पर टेकिए।
हाथों को एकदम कमर से नहीं हटाइए। इस आसान को ४-५ बार किया जा सकता है। 
लाभ:
         स्लिप डिस्क,कमर एवं ग्रीवा-पीड़ा(back and neck) व् उदर(abdominal), गैस्ट्रिक प्रॉब्लम रोगो में विशेष लाभप्रद है।


वज्रासन(VAJRASAN)  

विधिः 
१.      दोनों पैरों को मोड़कर नितम्ब के निचे इस प्रकार रखें  एड़ियाँ बहार की ओर निकली हुई तथा पंजे नितम्ब से लगे हुए हो।
२.      इस स्थिति में पैरों के अंगूठे एक दूसरे से लगे हुए होंगें। कमर,ग्रीवा एवं सिर सीधे रहें। घुटने मिले हुए हों। हाथों को घुटनों पर रखें।




लाभ:
      भोजन के करने के बाद किया जानेवाला यह एक मात्र आसन है। यह आसन करने से अपचन ,अम्लपित्त,गैस,कब्ज के लिए लाभकारी है। भोजन के बाद ५ से १५ मिनिट तक करने से भोजन का पाचन ठीक से होता है। ये आसन  घुटनो की पीड़ा में लाभदाई है। 


पश्चिमोत्तनासन(PASCHIMOTANASNA)


विधिः 
१.     दण्डासन में बैठकर दोनों हाथों के अंगुष्ठो व् तर्जनी की सहायता से पैरो के अंगूठो को पकड़िये। 

२.     श्वास बहार निकालकर सामने झुकते हुए सिर को घुटनों के बीच लगाने का प्रयत्न कीजिये। पेट को उड़ियान बन्ध की स्थिति मे रख सकते है। घुटने-पैर सीधे भूमि पर लगे हुए तथा कोहनियाँ भी भूमि अपर टिकी हुई हों। इस स्थिति में शक्ति अनुसार आधे से तीन मिनिट तक रहें। फिर श्वास छोड़ते हुए वापस सामान्य स्थिति मे आ जाएँ।


 
                                                                                              
  
                           लाभ: 

     पेट की पेशियों में संकुचन होता है। जठारग्नि को प्रदीप्त करता है व् वीर्य सम्बन्धी विकारो को नष्ट करता है। कदवृद्धि के लिए महत्वपूर्ण अभ्यास है। 

Friday, January 9, 2015

अपानआसन (Apanasana)



विधिः  

     अपने पीठ पर लेट जाये। अपने घुटनो को और पैरो को सीने  की और मोड़े। अपने हाथो को पेरो की मध्यमा पिंडली को पकडे। अपने सिर और कंधे को जमीन पर टिका कर रखे। अपने सर के निचे  कंबल या तकिया रख सकते है। गहरी सांस ले।  कम  से कम एक या दो मिनिट के लिए आसन करे।
       अच्छा परिणाम  के लिए लगातार अभ्यास करना जरुरी है।



   लाभ:
          गैस्ट्रिक प्रॉब्लम के लिए लाभदायी है और अम्लता (Acydity) के लिए उपयोगी है।
वीडियो देखे :










Wednesday, December 17, 2014

वज्रासन(VAJRASAN)


विधिः 
१.      दोनों पैरों को मोड़कर नितम्ब के निचे इस प्रकार रखें  एड़ियाँ बहार की ओर निकली हुई तथा पंजे नितम्ब से लगे हुए हो।
२.      इस स्थिति में पैरों के अंगूठे एक दूसरे से लगे हुए होंगें। कमर,ग्रीवा एवं सिर सीधे रहें। घुटने मिले हुए हों। हाथों को घुटनों पर रखें।




लाभ:
      भोजन के करने के बाद किया जानेवाला यह एक मात्र आसन है। यह आसन करने से अपचन ,अम्लपित्त,गैस,कब्ज के लिए लाभकारी है। भोजन के बाद ५ से १५ मिनिट तक करने से भोजन का पाचन ठीक से होता है। ये आसन  घुटनो की पीड़ा में लाभदाई है। 

IN ENGLISH:

Method
1. Keep both legs bent, heels outside the hip down to the bay and the claws are engaged from the buttock. 
2. This position will be engaged to each other toes. Waist, neck and head are straight. Knees are met. Place the hands on the knees.

Benefits:
Going after the meal is the only posture. The posture of the indigestion, pyrosis, gas, is beneficial for constipation. From 5 to 15 minutes after eating the food is properly digested. The posture of knees in anguish benefits you.

Saturday, December 13, 2014

योग मुद्रासन (YOG MUDRASAN)





विधिः 
१.      पद्मासन में बैठकर दोनों हाथों को पीठ के पीछें लेजाकर दाएं हाथ से बाएं हाथ को कलाई को पकड़ें। 
२.      श्वास बाहर छोड़ते हुए भूमि पर ठोड़ी स्पर्श करें ,दृश्टि सामने रहे। ठोड़ी यदि भूमि पर नहीं लगती है तो यथाशक्ति सामने झुकें। 

लाभ :
        पेट के लिए उत्तम आसन है। जठराग्नि को प्रदीप्त करता है तथा गैस,अपचन व् कब्ज आदि रोगो में लाभ मिलता है। पेन्क्रियाज को क्रियाशील करके डायबिटीज को नियंत्रित करने में लाभकारी है। 

Saturday, December 6, 2014

रोग उपचारिक नुस्खे (HEALTH TIP)

* पेट दर्द के लिए भुना हुवा छोले से मालिश करने से लाभ होते है।
* मूली का रस और दही त्वचा पे लगाने से निखार आएगा।
* गर्म सर्सो का तेल और गर्म घी नाल पे लगाने से होठ फट ने से राहत रहेगी।
* मुहांसे से छुटकारा पाने के लिए गाजर, तरबूज, तुलसी और पालक के जूस पिये।
* दांत दर्द से राहत पाने के लिए लौंग पाउडर में मिलाकर दांत पर मलिए। 
* खुजली से राहत पाने के लिए आंवला के पाउडर में तेल मिलाकर मालिश करीये। 
* पेट में अधिक गैस रहता है तो, गरम पानी में आधा निम्बू का रस ओर बेकिंग सोडा मिलकर पिने से राहत मिलती है। 
* एक चम्मच तुलसी के रस के साथ शहद मिलाकर चखने से प्रदर रोग में राहत मिलेगी। 
* दस्त होने पर आधा कप अनार का रस पिने से लाभ होता है। 
* भोजन के बाद एक चम्मच अदरक का रस के साथ सेंधा नमक मिश्रित कर पिने से बोजन जल्द पच  जाता है। 
* नींबू के रस का एक बड़ा चमचा, जीरा पाउडर में मिलाकर पिने से उल्टी मे लाभ मिलेगा। 
* खासी-जुकाम से राहत पाने के लिए गर्म पानी में नमक-हल्दी पाउडर मिलाकर पिये। 
* सीने से कफ छुटकारा पाना के लिए अदरक का रस की एक चम्मच के साथ एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन बार ले। 
* चेहरे पे जायं हटाने के लिए  एक चम्मच शहद में एक अंडे की सफ़ेदी मिलाकर पेस्ट बनाकर जायं  पे लगाए।  सूखने  के बाद ठंडे पानी से चेहरा साफ करले। यह 4-5 दिनों तक लगातार करने से फायदा होगा। 
* मूली का रस और दही लगाने से त्वचा निखरेगी। 
* हैजा मरीज के पेट और कमर पे  ठंडे पानी में भिगो कर तौलिया रखने से  लाभ होता है।
* जाम्बु के नरम पत्ते को कूट कर पानी में मिलाकर कुल्ले करने से मुहं के छाले में राहत मिलती है। 
* सरसों के तेल मे अदरक  का क्रश डालके उबाल कर इस तेल को  जोड़ो पे लगाने से राहत मिलेगी।
* बादाम के छिलके को जलाकर उसकी राख को दांत पर घिसने से दांत पर की पिलाश दूर होती है। 
* माइग्रेन से राहत प्राप्त करने के लिए लहसुन की पेस्ट रोगी की कनपटी पे लगाने से राहत मिलेगी।

Monday, November 17, 2014

नौकासन (Naukasana)

नौकासन(Naukasana) 

विधि:
१.      दोनों हाथों से ऊपर रखकर सीधे लेट जाये। अब श्वास अंदर भरते हुए पहले सिर एवं कंधो को ऊपर उठाये फिर पैरो को भी ऊपर उठाये। हाथ,पैर एवं सिर समांतर नाव  की तरह उठे हुए रखे। 
२.      इस स्तिथि मे कुछ समय रूककर धीरे-धीरे हाथ-पैर एवं सिर को भूमि पर श्वास बाहर निकालते हुए ले आए। इस प्रकार ३ से ६ बार तक आवृत्ती कर सकते है। 


 


लाभ:
१.      यह आसन आंतो के लाभदायी है एवं कब्ज,गैस,मोटापा आदि को दूर करता है।  
२.     हृदय एवं फेफड़े भी प्राण वायु के प्रवेश से सबल बनते है। 
३.     आंत्र,आमाशय,अग्नाशय एवं यकृत आदि के लिये उत्तम है।  



वीडियो देखे :