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Wednesday, April 8, 2015

मर्जरासना (Marjrasana)

मर्जरासना (Marjrasana)
(cowpose-catpose)

विधिः 
१.      दोनों हाथों की हथेलियों एवं घुटनों को भूमि पर टिकाते हुए स्थिति लीजिये। 




      




२.      अब श्वास अन्दर भरकर छाती और सिर को ऊपर उठाये ,कमर निचे की ओर झुकी हुई हो। थोड़ी देर इस स्थिति में रहकर श्वास बाहर छोड़ते हुए पीठ को ऊपर उठाये तथा सर को निचे झुकायें। 



 लाभ:
       गर्दन के दर्द में राहत मिलती है और कटी पीड़ा ओर गैस ,कब्ज एवं फेफड़ो को मजबूत करता है और गर्भाशय को बाहर निकलने जैसो रोगो को दूर करता है। 

Friday, December 26, 2014

अम्लता (ACIDITY) के लिए आसान

   अम्लता (ACIDITY) सभी रोगियों की तुलना में आज करीब आधे से अधिक रोगो में देखा जाता है। वर्तमान में इस हालत का जिम्मेदार तनाव देखा जाता है, जो प्रमुख कारणों में से एक है। 

*   यहाँ अम्लता(ACIDITY) रोग में आप के लिए मदद कर सकते हैं जो योग के कुछ सुझाव हैं। नियमित प्राणायाम और ध्यान करे। 

वज्रासन(VAJRASAN)


विधिः 
१.      दोनों पैरों को मोड़कर नितम्ब के निचे इस प्रकार रखें  एड़ियाँ बहार की ओर निकली हुई तथा पंजे नितम्ब से लगे हुए हो।
२.      इस स्थिति में पैरों के अंगूठे एक दूसरे से लगे हुए होंगें। कमर,ग्रीवा एवं सिर सीधे रहें। घुटने मिले हुए हों। हाथों को घुटनों पर रखें।




लाभ:
      भोजन के करने के बाद किया जानेवाला यह एक मात्र आसन है। यह आसन करने से अपचन ,अम्लपित्त,गैस,कब्ज के लिए लाभकारी है। भोजन के बाद ५ से १५ मिनिट तक करने से भोजन का पाचन ठीक से होता है। ये आसन  घुटनो की पीड़ा में लाभदाई है। 



पवन मुक्तासन (Pawanmukta asan)

विधि:
१.      सीधे लेट कर दाये  पैर के घुटने को छाती पर रखे।
२.      दोनों हाथो को,अंगुलियों एक दूसरे में सड़ते हुए घुटने पर रखे ,श्वास बाहर निकलते हुए घुटने को दबाकर छाती से लगाये एवं सर को उठाते हुए घुटने से नासिका स्पर्श करे,करीब १० से ३० सेकंड तक श्वास को बाहर रोकते हुए इस स्थिति में रहकर फिर पैर को सीधा कर दे।


                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                      

       

  ३.       इसी तराह दूसरे पैर से करे। फिर दोनों पैरो से एक साथ करे। इस प्रकार ३ से ५ बरी करे। 
४.      दोनों पैरो को पकड़ के शरीर को आगे-पीछे-दये-बाये लुढ़काए।




लाभ:  

१.     ये आसन वायुविकार ,स्त्री रोग अल्पावर्त,कष्टार्त्तव एवं गर्भाशय सम्बन्धी रोगो के लिए लाभदायी है। 
    २.     मोटापा,अम्लपित्त,हदयरोग,गठिया एवं कटी पीड़ा में लाभदायी है।



वीडियो देखे:










Wednesday, December 17, 2014

वज्रासन(VAJRASAN)


विधिः 
१.      दोनों पैरों को मोड़कर नितम्ब के निचे इस प्रकार रखें  एड़ियाँ बहार की ओर निकली हुई तथा पंजे नितम्ब से लगे हुए हो।
२.      इस स्थिति में पैरों के अंगूठे एक दूसरे से लगे हुए होंगें। कमर,ग्रीवा एवं सिर सीधे रहें। घुटने मिले हुए हों। हाथों को घुटनों पर रखें।




लाभ:
      भोजन के करने के बाद किया जानेवाला यह एक मात्र आसन है। यह आसन करने से अपचन ,अम्लपित्त,गैस,कब्ज के लिए लाभकारी है। भोजन के बाद ५ से १५ मिनिट तक करने से भोजन का पाचन ठीक से होता है। ये आसन  घुटनो की पीड़ा में लाभदाई है। 

IN ENGLISH:

Method
1. Keep both legs bent, heels outside the hip down to the bay and the claws are engaged from the buttock. 
2. This position will be engaged to each other toes. Waist, neck and head are straight. Knees are met. Place the hands on the knees.

Benefits:
Going after the meal is the only posture. The posture of the indigestion, pyrosis, gas, is beneficial for constipation. From 5 to 15 minutes after eating the food is properly digested. The posture of knees in anguish benefits you.

Saturday, December 13, 2014

योग मुद्रासन (YOG MUDRASAN)





विधिः 
१.      पद्मासन में बैठकर दोनों हाथों को पीठ के पीछें लेजाकर दाएं हाथ से बाएं हाथ को कलाई को पकड़ें। 
२.      श्वास बाहर छोड़ते हुए भूमि पर ठोड़ी स्पर्श करें ,दृश्टि सामने रहे। ठोड़ी यदि भूमि पर नहीं लगती है तो यथाशक्ति सामने झुकें। 

लाभ :
        पेट के लिए उत्तम आसन है। जठराग्नि को प्रदीप्त करता है तथा गैस,अपचन व् कब्ज आदि रोगो में लाभ मिलता है। पेन्क्रियाज को क्रियाशील करके डायबिटीज को नियंत्रित करने में लाभकारी है। 

Saturday, December 6, 2014

रोग उपचारिक नुस्खे (HEALTH TIP)

* पेट दर्द के लिए भुना हुवा छोले से मालिश करने से लाभ होते है।
* मूली का रस और दही त्वचा पे लगाने से निखार आएगा।
* गर्म सर्सो का तेल और गर्म घी नाल पे लगाने से होठ फट ने से राहत रहेगी।
* मुहांसे से छुटकारा पाने के लिए गाजर, तरबूज, तुलसी और पालक के जूस पिये।
* दांत दर्द से राहत पाने के लिए लौंग पाउडर में मिलाकर दांत पर मलिए। 
* खुजली से राहत पाने के लिए आंवला के पाउडर में तेल मिलाकर मालिश करीये। 
* पेट में अधिक गैस रहता है तो, गरम पानी में आधा निम्बू का रस ओर बेकिंग सोडा मिलकर पिने से राहत मिलती है। 
* एक चम्मच तुलसी के रस के साथ शहद मिलाकर चखने से प्रदर रोग में राहत मिलेगी। 
* दस्त होने पर आधा कप अनार का रस पिने से लाभ होता है। 
* भोजन के बाद एक चम्मच अदरक का रस के साथ सेंधा नमक मिश्रित कर पिने से बोजन जल्द पच  जाता है। 
* नींबू के रस का एक बड़ा चमचा, जीरा पाउडर में मिलाकर पिने से उल्टी मे लाभ मिलेगा। 
* खासी-जुकाम से राहत पाने के लिए गर्म पानी में नमक-हल्दी पाउडर मिलाकर पिये। 
* सीने से कफ छुटकारा पाना के लिए अदरक का रस की एक चम्मच के साथ एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन बार ले। 
* चेहरे पे जायं हटाने के लिए  एक चम्मच शहद में एक अंडे की सफ़ेदी मिलाकर पेस्ट बनाकर जायं  पे लगाए।  सूखने  के बाद ठंडे पानी से चेहरा साफ करले। यह 4-5 दिनों तक लगातार करने से फायदा होगा। 
* मूली का रस और दही लगाने से त्वचा निखरेगी। 
* हैजा मरीज के पेट और कमर पे  ठंडे पानी में भिगो कर तौलिया रखने से  लाभ होता है।
* जाम्बु के नरम पत्ते को कूट कर पानी में मिलाकर कुल्ले करने से मुहं के छाले में राहत मिलती है। 
* सरसों के तेल मे अदरक  का क्रश डालके उबाल कर इस तेल को  जोड़ो पे लगाने से राहत मिलेगी।
* बादाम के छिलके को जलाकर उसकी राख को दांत पर घिसने से दांत पर की पिलाश दूर होती है। 
* माइग्रेन से राहत प्राप्त करने के लिए लहसुन की पेस्ट रोगी की कनपटी पे लगाने से राहत मिलेगी।

Friday, November 14, 2014

हलासन

हलासन(Halasan) 

विधि:
१.     पीठ के बल लेट जायें,अब श्वास अंदर भरते हुए धीरे से पैरो को उठाये। पहले ३०,६० डिग्री फिर ९० डिग्री तक उठाने के बाद पैरो को सीर के           पीछे की और पीठ को भी ऊपर उठाते हुए श्वास को बहार निकालते हुए         ले जाये। 
२.     पैरो को सर के पीछे भूमि पर टिका दें। प्रारम्भ में हाथो को कमर के पीछे लगा दे। पूरी स्थिति में हाथ भूमि पर ही रखे,इस स्थिति में ३०         सेकंड रखे। 


३.     वापस जिस क्रम से ऊपर आए थे उसी क्रम से भूमि को हथेलियों को दबाते हुए पैरो को घुटनो से सीधा रखते हुए भूमि प्रर रखे। 

 

लाभ :

१.     थाइराइड ग्रंथि को चुस्त और मोटापा,दुर्बलता आदि को दूर करता है। 
२.    मेरुदण्ड को स्वस्थ,लचीला बना कर पृष्ठ भाग की मास  पेशियों को निरोगी बनता है। 
३.   गैस, कब्ज,डायबिटीस,यकृत-वृद्धि एवं हदय रोग में लाभकारी है। 

सावधानियाँ :
१.   उच्च रक्तचाप,स्लिपडिस्क,सर्वाइकल, टी.बि. आदि मेरुदण्ड के रोगी इस आसान को ना करे।