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Friday, November 28, 2014

भस्त्रिका प्राणायाम (Bhastrika pranayam)



प्राणायाम की सम्पूर्ण प्रक्रियाए :
      प्रत्येक प्राणायाम का अपना एक विशेष महत्व है,सभी प्राणायामों का वयक्ति प्रतिदिन अभ्यास नहीं कर सकता। इस पूरी प्रक्रिया में लगभद २० मिनिट का समय लगता है। 
 भस्त्रिका प्राणायाम (Bhastrika pranayam)




      ध्यानत्मक आसन में बैठकर दोनों नासिकाओं से श्वास को पूरा अन्दर डायफ्राम  तक भरना एव बाहर पूरी शक्ति के साथ छोड़ना भस्त्रिका प्राणायाम कहते है। प्रणायाम को अपनी शक्ति अनुसार तीन प्रकार से किया जाता है। मंद गति से,मध्यम गति से तथा तीव्र गति से। इस प्राणायम को ३-५ मिनिट तक करना चाहिए। दिव्य संकल्प से साथ किया हुवा प्राणायाम विशेष लाभदाई है। 
सूचन :
     जिनको हदय रोग हो , उन्हें तीव्र गति से ये प्राणायाम नहीं करना चाहिए। इस प्राणायाम के दौरान श्वास को अन्दर भरे तब पैट को नहीं फुलाना चाहिए। ग्रीष्म ऋतु में अल्प मात्रा में करे। इस प्राणायाम को ३ से लेकर ५ मिनिट तक रोज करे। 
     प्राणायाम की क्रियाओ को करते समय आँखों को बन्द रखे और मन में प्रत्येक श्वास-पश्वास के साथ ओ३म का मानसिक रूप से चिन्तन व् मनन करना चाहिये। 
लाभ :
१.      सर्दी-जुकाम ,एलर्जी,श्वास रोग,दमा,पुराना नजला,साइनस आदि समस्त कफ रोग दूर होते है। 
२.      थाइरोड व् टान्सिल आदि गले के समस्त रोग रोग दूर होता है। 

३.      प्राण व् मन स्थिर होता है। 

Monday, November 17, 2014

प्राणायाम के लाभ एवं महत्व


प्राणायाम के लाभ एवं महत्व (Benefit of pranayam)

      हमारे शरीर में जितनेही चेष्टाएँ होती है उन सभी का प्राण से प्रत्यक्ष सम्बन्ध है। प्रणायाम से इन्द्रियों एवं मन के दोष्  दूर होते है। 
      आसन  से योगी को रजोगुण,प्राणयाम से पापनिवृति और पत्याहार से मानसिक विकार दूर रहते है। स्थूल रूप से प्राणायाम श्वास-प्रश्वास के व्यायाम की एक पद्धति है,जिस से फेफड़े मजबूत ,दीर्घ आयु का लाभ मिलता है। विभिन रोगो का निवारण प्राण-वायु का प्राणायाम द्वारा नियमन करने से सहजतापूर्वक किया जा सकता है। प्राणायाम द्वारा उद्वेग,चिंता,क्रोध,निराशा ,भय और कामुकता आदि मनोविकार का समाधान सरलतापूर्वक किया जा सकता है। प्राणायाम से मसितष्क  की क्षमता बढाकर स्मरण-शक्ति,सुझबूझ,कुशग्रता ,दूरदर्शिता,धारणा ,मेघा आदि मानसिक विशेषताओ प्राप्त किया जा सकता है। 
      भगवान की और से हमें जो जीवन मिला है ;उसमे प्राण श्वास गिनकर मिलते है। जिसके जैसे कर्म होते है उसी के अनुसार उसको अगला जन्म मिलता है। प्राणायाम करने वाला अपने श्वासो का काम प्रयोग करता है,इसलिए वह दीर्घायु भी होता है।  वैसे भी इस सुष्ट्री में जो प्राणी जितने कम श्वास लेते है उतने ही दीर्घजीवी भी होते है। 


प्राणायाम को प्रतिदिन अभ्यास करने से व्यक्ति को जो मुख़्य लाभ होते है ,इस प्रकार से है।

१.      हदय,फेफड़े व् मसितष्क सम्बन्धी रोग दूर होते है। 
२.     मोटापा,कोलेस्ट्रोल ,मधुमेह,कब्ज,गैस,श्वास रोग,एलर्जी,माइग्रेन,रक्तचाप,किडनी के रोग,पुरुष व्  स्त्रियों के समस्त यौन रोग आदि सामान्य रोगों से लेकर सभी साध्य-असाध्य रोग दूर होते है। 

३.      मन अत्यंत स्थिर,शान्त व् प्रशन्न तथा उत्साहित तथा डिप्रेशन आदि रोगो से लाभ मिलता है।    
4.      वात,पित्त व् कफ में लाभ दाई है। 
५.     वंशानुगत सायबिटीज,हदयरोग से बचा सकता है। 
६.      पाचनतंत्र स्वस्थ हो जाता है और उदर रोग दूर हो जाते है। 
७.     समस्त रोग काम,क्रोध,लोभ,मोह व् अहंकार दोष नष्ट हो जाते है। 
८.      बालों का जड़ना,सफ़ेद होना,चारे पैर झुरिया पड़ना आदि से बच सकता है। 
९.      बुढ़ापा देर से आएगा तथा आयु बढ़ेगी। 
१०.     प्राणायाम का अभ्यास करनेवाले व्यक्ति सदा सकारत्मक विचार,चिंतन व् उत्साह से भरा हुवा  रहता है। 

Sunday, November 16, 2014

उत्तानपादासन

उत्तानपादासन 

विधि:
१.  पीठ  के बल लेट जाये। हथेलियां भूमि की और, पैर सिधे, पंजे मिले हुऐ हों। 
२.  अब श्वास अन्दर भरकर पैरों को १ फुट तक धीरे-धीरे ऊपर उठायें। कुछ,समय तक इसी स्थिति मे बने रहें। 
३.  वापस आते समय धीरे-धीरे पैरों को नीचे भूमि पर टिकाये, ज़टके के साथ नहीं। कुछ विश्राम कर फिर यही क्रिया कीजिए। इसे ३-६ बार करना चाहिए।
४. जिनको कमर मे अधिक दर्द रहता हो। वे एक-एक पैर से क्रमशः इस अभ्यास को करें। 




लाभ:
१.  यह आसन आँतो को सबल एवं निरोग बनाता है तथा कब्ज, गैस, मोटापा आदि को दूर कर जठराग्नि को प्रदीप्त करता है। 
२.  नाभि का टलना,पेटदर्द,हदयरोग एवं श्वास रोग में भी लाभदायी है। कमरदर्द में विशेष लाभदायी है। 


वीडियो देखे :