Monday, June 29, 2015

अस्थमा के घरेलू उपचार


Remèd lakay Opresyon

लहसुन दमा के इलाज में काफी कारगर साबित होता है। 30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से दमे में शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है।
अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है। सबेरे और शाम इस चाय का सेवन करने से मरीज को फायदा होता है।
दमा रोगी पानी में अजवाइन मिलाकर इसे उबालें और पानी से उठती भाप लें, यह घरेलू उपाय काफी फायदेमंद होता है। 4-5 लौंग लें और 125 मिली पानी में 5 मिनट तक उबालें। इस मिश्रण को छानकर इसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाएँ और गरम-गरम पी लें। हर रोज दो से तीन बार यह काढ़ा बनाकर पीने से मरीज को निश्चित रूप से लाभ होता है।
180 मिमी पानी में मुट्ठीभर सहजन की पत्तियां मिलाकर करीब 5 मिनट तक उबालें। मिश्रण को ठंडा होने दें, उसमें चुटकीभर नमक, कालीमिर्च और नीबू रस भी मिलाया जा सकता है। इस सूप का नियमित रूप से इस्तेमाल दमा उपचार में कारगर माना गया है।
अदरक का एक चम्मच ताजा रस, एक कप मैथी के काढ़े और स्वादानुसार शहद इस मिश्रण में मिलाएं। दमे के मरीजों के लिए यह मिश्रण लाजवाब साबित होता है। मैथी का काढ़ा तैयार करने के लिए एक चम्मच मैथीदाना और एक कप पानी उबालें। हर रोज सबेरे-शाम इस मिश्रण का सेवन करने से निश्चित लाभ मिलता है।

lahsun

Sunday, June 28, 2015

करी पत्तों के सौंदर्य लाभ


Beauty Benefits Of Curry Leaves 


क्या आपको मालूम है करी पत्ते के ये 4 ब्यूटी फायदे?
1. गिरते बालों और डैंड्रफ को करे कम - बालों के इन दो बड़े प्रॉब्लम का एक सिंपल सॉल्यूशन है - करी पत्ता. करी पत्ता डैंड्रफ को कम करता है और बालों के बढ़ने में भी मदद करता है.
- इसे कैसे तैयार करें - बिल्कुल मुलायम करी पत्ते को थोड़े से दूध के साथ पीस कर पेस्ट बना लें. इसे अपने स्कैल्प पर लगाएं और 15-20 मिनट के बाद धो लें. इसे हर दूसरे दिन लगाएं और बालों से डैंड्रफ को कोसों दूर भगाएं.

क्या आपको मालूम है करी पत्ते के ये 4 ब्यूटी फायदे?

2. करी पत्ते का तेल - ये आपके बालों के लिए फायदेमंद है. ये समय से पहले बालों का सफेद होना रोकता है और उन्हें जड़ो से मजबूत बनाता है. इसकी खुशबू इस तेल को और भी यूज़र-फ्रेंडली बनाती है.

- इसे कैसे तैयार करें - एक पैन में थोड़ा नारियल तेल गरम करें और उसमें साफ और सूखे करी पत्ते को मिलाएं. जब पत्तों का रंग बदल जाएं, तो गैस बंद कर दें और इसे ठंडा होने दें. अब अपनी उंगलियों का इस्तेमाल करके पत्तों को तेल में मैश करें. इसके बाद इसे छान कर, पत्तों को अलग कर लें. आपका तेल लगाने के लिए तैयार है.


क्या आपको मालूम है करी पत्ते के ये 4 ब्यूटी फायदे?
3. पिंपल और पिंपल मार्क्स को करे कम - पिंपल्स और मार्क्स के लिए हर बार डॉक्टर के पास जाने की क्या ज़रूरत? इनसे छुटकारा दिलाने के लिए करी पत्ता आसान तरीका है. ये एक्ने-प्रोन एरिया को आराम और ठंडक पहुंचाता है. इतना ही नहीं, इसके रेगुलर इस्तेमाल से पिंपल्स मार्क्स भी खत्म हो जाते हैं.

ऐसे बनाएं इसे - करी पत्ते को धो लें और पीस कर पेस्ट बना लें. इसमें लेमन जूस मिलाएं और प्रॉब्लम एरिया पर लगाएं. 10 मिनट बाद इसे धो लें. बेहतर रिजल्ट के लिए इसे हर दूसरे दिन लगाएं.

क्या आपको मालूम है करी पत्ते के ये 4 ब्यूटी फायदे?

4. ये है एक फेस पैक भी - करी पत्ते हमारे चेहरे पर चमक लाने का काम भी करता है. करी पत्ते से बना फेस मास्क चेहरे की फाइन लाइन की समस्या दूर करता है और चेहरे के ग्लो को बरकरार रखता है.

इसे ऐसे करें तैयार - करी पत्ते को धूप में सूखा लें और उन्हें क्रश करके पाउडर बना लें. इसमें थोड़ी मुलतानी मिट्टी और गुलाब जल मिलाएं. अब इसमें कोई भी तेल मिला लें. इसे चेहरे पर लगाएं और 20 मिनट के बाद इसे धो लें.


Roshni Chand's photo.
Roshni Chand's photo.

Friday, June 26, 2015

हाई बीपी के लिए तीन योग....

    हाई बीपी से देश करीब १० करोड़ लोग पीड़ित है। हाई बीपी का मुख्य कारन है तनाव,तनाव के लिए तीन प्राणायाम बहुत ही महत्वपूर्ण है, अनुलोमविलोम,भ्रामरी और शवासन  प्राणायाम। 
    रोज ३ से ४ लीटर पानी पीना चाहिए। लोकी का जुश साथमे आमला मिलाकर पीना चाहिए ,ध्यान रखिये लोकी कड़वी नहीं होनी चाहिए। इसे पीनी से हाई बीपी कंट्रोल होता है। 

अनुलोमविलोम



   दाएँ हाथ को उठकर दाएँ  हाथ के अंगुष्ठ के द्वारा दायाँ स्वर तथा अनामिका व् मध्यमा अंगुलियों के द्वारा बायाँ स्वर बन्द करना चाहिए। हाथ की हथेली नासिका के सामने न रखकर थोड़ा ऊपर रखना चाहिए।
विधि:
      अनुलोम-विलोम प्राणायाम को बाए नासिका से प्रारम्भ करते है। अंगुष्ठ के माध्यम से दाहिनी  नासिका को बंध करके बाई नाक से श्वास धीरे-धीरे अंदर भरना चाहिए। श्वास पूरा अंदर भरने पर ,अनामिका व् मध्यमा से वामश्वर को बन्ध  करके दाहिनी नाक से पूरा श्वास बाहर छोड़ देना चाहिए। धीरे-धीरे श्वास-पश्वास की गति मध्यम और तीव्र करनी चाहिए। तीव्र गति से पूरी शक्ति के साथ श्वास अन्दर भरें व् बाहर निकाले व् अपनी शक्ति के अनुसार श्वास-प्रश्वास के साथ गति मन्द,मध्यम और तीव्र करें। तीव्र गति से पूरक, रेचक करने से प्राण  की तेज ध्वनि होती है। श्वास पूरा बाहर निकलने पर वाम स्वर को बंद रखते हुए दाए नाक से श्वास पूरा अन्दर भरना चाहिए तथा अंदर पूरा भर जाने पर दाए नाक को बन्द करके बाए नासिका से श्वास बाहर छोड़ने  चाहिए। यह एक प्रकियापुरी हुई। इस प्रकार इस विधि को सतत करते रहना। थकान होने पर बीच में थोड़ा विश्राम करे फिर पुनः प्राणायाम करे। इस प्रकार तीन मिनिट से प्रारम्भ करके  इस प्राणायाम को १० मिनिट तक किया जा सकता है।



भ्रामरी प्राणायाम(BHRAMRI PRANAYAM)




विधि:
        श्वास पूरा अन्दर भर कर मध्यमा अंगुलियों से नासिका के मूल में आँख के पास दोनों ओर से थोड़ा दबाएँ, अंगूठो के द्वारा दोनों कानो को पूरा बन्ध कर ले। अब भ्रमर की भाँति गुंजन करते हुए नाद रूप में ओ३म का उच्चारण करते हुए श्वास को बाहर छोडदे। इस तरह ये प्राणायाम कम से कम  ३ बार अवश्य करे। अधिक से ११ से १२ बार तक कर सकते हो।
        मन में यह दिव्य संकल्प या विचार होना चाहिए की मुज पर भगवन की करुणा ,शांति व् आनंद बरस रहा है। इस प्रकार शुद्ध भाव से यह प्राणायाम करने से एक दिव्य ज्योति आगना चक्र में  प्रकट होता है और ध्यान स्वत: होने  लगता है।

लाभ:

        मानसिक तनाव,उत्तेजना,उच्च रक्तचाप,हदयरोग आदि दूर होता है। ध्यान  के लिए उपयोगी है। 

शवासन
विधिः  
   पीठ के बल सीधे भूमि पर लेट जाइए। दोनों पैरो में लगभग एक फुट का अन्तर हो तथा दोनों हाथो को भी जंघाओं से थोड़ी दूरी पर रखते हुए हाथों को ऊपर की और खोलकर रखें। आँखे बंध ,गर्दन सीधी ,पूरा शरीर तनाव रहित अवस्था में हो। धीरे-धीरे चार से पांच श्वास लम्बे भरें व् छोड़े। 


लाभ: 
        मानसिक तनाव ,उचरक्तचाप, हदयरोग तथा अनिद्रा के लिए यह आसन लाभकारी है। स्नायु-दुर्बलता ,थकान दूर करता है। कोई भी आसन करते हुए बीच-बीच में शवासन करने से शरीर में थकान दूर हो जाती है।

Saturday, June 20, 2015

20 benefits of Walking ......

Practice Yoga: It can make you feel active,energetic and positive.Live Life to its full potential.Join 21st June Yoga day .




१.    विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं है
२.   अधिक सक्रिय रहने के लिए  सबसे आसान तरीकों में से एक।  
३.   अवसाद( depression) और चिंता(anxiety) के लक्षण कम कर देता है।
४.   मोटापा को कम करने  मदद करता है। 
५.   यह हर किसी के लिए लाभदायी है। 
६.   यह कम प्रभाव व्यायाम है। 
७.   ये LDL को कम करता है। 
८.   ये HDL (GOOD CHOLESTEROL) को बढ़ाता है।
९.   ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है। 
१०.  असामान्य सेल ग्रोथ के जोखिम को कम कर देता है। 
११.  टाइप 2 मधुमेह जोखिम कम करताहै और एड्स के जोखम कम कर देता है। 
१२.  मूड में सुधार(IMPROVES MOOD) . 
१३.  दुबला मांसपेशियों के ऊतकों बनाए रखने में मदद करता है। 
१४.  हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। 
१५.  दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम करता है। 
१६   तनाव को कम करता है। 
१७.  हृदय रोग के जोखिम को कम कर देता है। 
१८. चोटों लगने की संभावना कम। 
१९.  आप को इसके लिए भुगतान करने की जरूरत नहीं। 
२०.  एरोबिक्स फिटनेस बनाता है। 







Friday, June 12, 2015

सिरदर्द ओर माइग्रेन से छुटकारा पाने के लिए प्राणायाम ओर कुछ घरेलू नुश्खे......

    सिरदर्द कभी गर्मी लगने से हो जाता है कभी शर्दी लगने से हो जाता है और कभी गैस के कारन सिरदर्द होता है। यदि शर्दी के कारन से सिर  दर्द है तो कपालभाति प्राणायाम करे, अगर गैस के कारन आपको सिरदर्द है तो अनुलोम विलोंम प्राणायाम करे। ये प्राणायाम १५ मिनिट से ले के ३० मिनिट तक करना चाहिए।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम (ANULOM-VILOM PRANAYAM)



 दाएँ हाथ को उठकर दाएँ  हाथ के अंगुष्ठ के द्वारा दायाँ स्वर तथा अनामिका
व् मध्यमा अंगुलियों के द्वारा बायाँ स्वर बन्द करना चाहिए। हाथ की हथेली नासिका के सामने न रखकर थोड़ा ऊपर रखना चाहिए।
विधि:
      अनुलोम-विलोम प्राणायाम को बाए नासिका से प्रारम्भ करते है। अंगुष्ठ के माध्यम से दाहिनी  नासिका को बंध करके बाई नाक से श्वास धीरे-धीरे अंदर भरना चाहिए। श्वास पूरा अंदर भरने पर ,अनामिका व्
मध्यमा से वामश्वर को बन्ध  करके दाहिनी नाक से पूरा श्वास बाहर छोड़ देना चाहिए। धीरे-धीरे श्वास-पश्वास की गति मध्यम और तीव्र करनी
चाहिए। तीव्र गति से पूरी शक्ति के साथ श्वास अन्दर भरें व् बाहर निकाले व् अपनी शक्ति के अनुसार श्वास-प्रश्वास के साथ गति मन्द,मध्यम और तीव्र करें। तीव्र गति से पूरक, रेचक करने से प्राण  की तेज ध्वनि होती है। श्वास पूरा बाहर निकलने पर वाम स्वर को बंद रखते हुए दाए नाक से श्वास पूरा अन्दर भरना चाहिए तथा अंदर पूरा भर जाने पर दाए नाक को बन्द करके बाए नासिका से श्वास बाहर छोड़ने  चाहिए। यह एक प्रकियापुरी हुई। इस प्रकार इस विधि को सतत करते रहना। थकान होने पर बीच में थोड़ा विश्राम करे फिर पुनः प्राणायाम करे। इस प्रकार तीन मिनिट से प्रारम्भ करके  इस प्राणायाम को १० मिनिट तक किया जा सकता है।



कपालभाति प्राणायाम(Kapalbhati)



 कपाल अर्थात मश्तिष्क और भाति  का अर्थ होता है दीप्ती,आभा,तेज,प्रकाश आदि। कपालभाति में मात्र रेचक अर्थात श्वास को शक्ति पूर्वक बाहर छोड़ने में ही पूरा ध्यान दिया जाता है। श्वास को भरने के लिए प्रयत्न नहीं करते;अपितु सहजरूप से जितना श्वास अन्दर चला जाता है,जाने देते है,पूरी एकाग्रता श्वास को बाहर छोड़ने में ही होती है ऐसा करते हुए स्वाभाविक रूप से पेट में भि अकुंशन  व् प्रशारण की क्रिया होती है। इस प्राणायाम को ५ मिनिट तक अवश्य ही करना चाहिए। 
      कपालभाति प्राणायाम को करते समय मन में ऐसा विचार करना चाहिए की जैसे ही मैं श्वास को बाहर निकल रहा हूँ, इस पश्वास के साथ मेरे शरीर के समस्त रोग बाहर निकल रहे है। 
      तीन मिनिट से प्रारम्भ करके पांच मिनिट तक इस प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए। प्रणायाम करते समय जब-जब थकान अनुभव हो तब-तब बीच में विश्राम कर ले। प्रारम्भ में पेट या कमर में दर्द हो सकता है। वो धीरे धीरे अपने आप मिट जायेगा। 


     आप घरेलु उपाय कर सकते है। १ चमच्च रीठा का पावडर १ ग्लास पानिमे भिगोकर रखे। उसमे त्रिकुटा और काली मिर्च डाल सकते है। सुबह उस जोल को छानकर सुबह नाक में डाल दे सारा कफ बाहर निकल जायेगा।
    वायु के कारन सर दर्द होता है तो बादाम रोगन नाक में डाले और गाय का शुद्ध घी नाक में डाले इसे सिरदर्द में  लाभ होगा।  

Saturday, June 6, 2015

अर्ध चंद्रासन (Ardh Chandrasan)

विधिः 
१.     वज्रासन की स्थिति में बैठ जाये। अब एड़ियों को खड़ा करके उन पर दोनों हाथों को छाती पर रखिए। 
२.     श्वास अन्दर भरकर ग्रीवा एवं सिर को पीछे की और झुकाते हुए कमर को ऊपर की और तान दें। 





लाभ: 
       यह आसन स्वसन तन्त्र के लिए बहुत उपयोगी है। दमा के रोगियों के लिए लाभकारी है। सर्वाइकल स्पोंडोलाइटिस एवं सियाटिका आदि समस्त मेरुदण्ड के रोगो को दूर करता है और थाइराइड के लिए लाभकारी है। 

Saturday, May 30, 2015

पर्वतासन (Parvatasan)

विधिः 

पद्मासन में बैठकर दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाकर नमस्कार की मुद्रा मैं रखे। 


                                                                                                                                                                   
लाभ: मन की एकाग्रता को बढ़ता है।