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Tuesday, February 17, 2015

शशकासन (Shashankasana)


विधिः 

१.     वज्रासन में बैठकर दोनों हाथों को श्वास भरते हुए ऊपर उठाइये। 
२.     आगे झुकते हुए श्वास बाहर निकालें तथा हाथों को आगे फैलाते हुए हथेलियां निचे की और रखते हुए कोहनियों तक हाथों को भूमि पर टका दीजिये। माथा भी भूमि पर टिका हुवा हो। 
३.     कुछ समय इस स्थिति में रहकर पुनः वज्रासन में आ जाइए। 



लाभ :
      हदय की मालिश करता है इस लिए हदय रोगो में लाभकारी है
आँत(Intestine),यकृत(liver),अग्नाशय(pancreas) एवंगुर्दो(kidneys) को बल प्रदान करता है। मानसिक रोग(Mentalillnes),
तनाव(stress),क्रोध(anger),चिड़चिड़ापन(irritability),गुस्सा आदि रोगो को दूर करता है। गर्भाशय(uterus) को बल देता एवं पेट(abdomen),कमर की चर्बी को काम करता है। 


Sunday, November 23, 2014

कन्धरासन

कन्धरासन (Kandharasan)
विधि :
१.   सीधे लेटकर दोनों घुटनों को मोड़कर पैरों को नितम्ब के समीप रखिए।
२.  हाथों से पैर की ऐड़ी के उपरी हिस्से को पकड़िए। 
३.   श्वास अन्दर भरकर कमर एवं नितम्बों को उठाइए। कंधे सिर एवं एड़ियाँ भूमि पर टिके रहे। इस स्थिति में १५-२० सेकण्ड रुकिये। 
४.   वापस आते समय श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे कमर को भूमि पर टिकाइये। इस प्रकार ३-४ बार दोहराहिये। 






लाभ :
१.   पेट दर्द, कमर दर्द के लिए सर्वोत्तम आसन है।
२.   बन्ध्यात्व,मासिक विकृत्ति एवं श्वेत प्रदर के लिए लाभदाई है।