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Monday, February 2, 2015

ताड़ासन(Tadasana)



विधिः 
        पूर्ववत् खड़े होकर दोनों हाथो को पाश्वभाग से दीर्घ श्वास भरते हुए ऊपर उठाए। जैसे जैसे हाथ ऊपर उठे वैसे वैसे ही पैर की एड़िया भी उठी रहनी चाहिए। शरीर का भार पंजो पर रहेगा एवं शरीर ऊपर की ओर पूरी तराह से तना होगा।  




लाभ 
       यह आसन घुटनो के स्नायु को मजबूत करता है ,यह आसान कद वृद्धि के लिए सर्वोत्तम है। इससे समस्त शरीर के स्नायु ओ को सक्रीय एवं विकसित करता है। 

Friday, November 28, 2014

आसनोउपयोगी नियम:

आसनोउपयोगी नियम:(Rules of Asan)

१.     समय: आसन प्रातःसायं दोनों समय कर सकते है। यदि दोनों समय नहीं कर सकते तो प्रातः काल समय कर सकते हो। प्रातः खली पेट तथ दो पहर के भोजन के लगभग ५-६ घंटे बाद सायंकाल आसन कर सकते है।

२.     स्थान-वेशभूषा : स्वस्छ,शान्त,एवं एकांत स्थान आसान के लिए उत्तम है। यदि बाद,तालाब,या पानी के समीप हो तो उत्तम है। यदि घरमे आसन-प्राणायाम करते हो उस स्थान को दीपक,गूगल आदि जलाकर सुगन्धित करले। आसन करते समय कम एवं सुविधाजनक होने चाहिए।

३.     भोजन: भोजन आसन के लगभग आधे घण्टे  के बाद करे। आसन के बाद चाय नहीं पीनी चाहिये।

४.     श्वास-प्रश्वास का नियम: आसन करते समय नियम है की आगे की ओर झुकते समय श्वास बाहर निकलते है तथा पीछे की ओर झुकते समय श्वास अन्दर भर कर रखते है। श्वास नासिका से लेना ओर छोड़ना  चाहिए।

५.     विश्राम: आसन करते हुए जबजब थकान हो तब-तब शवासन या मकरासन में विश्राम करना चाहिये।पसीना आने पर तौलिये से पोंछले। योगासनो का अभ्यास १५-२० मिनिट बाद भी शरीर का तापमान सामान्य होने पर स्नान कर सकते है।  जिन व्यक्तियों का कभी अश्थी भंग हुवा हो ,वे कठिन आसनो का अभ्यास कभी  ना करे। 

Sunday, November 23, 2014

दिर्घ नौकासन

दिर्घ नौकासन(Dirgh navkasan)

 विधि:
१.     शवासन  में लेटकर दोनों हाथों को सिर के पीछे मिलाते हुए सिधा कर दें। 
२.     श्वास अन्दर  भरकर पैर,सिर एवं हाथ तीनों धीरे-धीरे करीब एक फुट ऊपर उठाइए नितम्ब एवं पीठ का निचला भाग भूमि पर लगा रहे। वापस आते समय श्वास छोड़ते समय धीरे-धीरे  हाथ,पैर सीर को भूमि पर
टिकाईये। 

लाभ: 
१.     पेट तथा  पीठ के लिए लाभदायी है। 
२.     हदयको मजबूत बनाने वाला श्रेष्ठ आसन है। 
३.     स्त्रीयो के लिए ये आसन उत्तम है -यह उनकी देह को सुडौल  बनता है।