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Wednesday, January 14, 2015

अर्ध मतस्यंद्रासन(Ardh matsyendraasana)


विधि:
१.      दण्डासन में बैठकर बाएं पैर को मोड़कर एड़ी को नितम्ब के पास लगाएँ। 
२.     दायें पैर को बाएँ के घुटने के पास बाहर की ओर भूमि पर रखें। 
३.     बाएँ हाथ को दायें घुटने के समीप बाहर की और सीधा रखते हुए दाएँ पैर को पंजे को पकड़ें। 
४.     दायें हाथ  को पीठ के पीछे से घुमाकर पीछे की ओर देखें। 
५.     इस प्रकार से दूसरी ओर से भी आसन करे।  



लाभ:  
        ये आसन से गुर्दे( Kidney),मधुमेह(Diabetes) एवं कमरदर्द(Spinal cord) लाभदायी है।

Friday, January 2, 2015

भुजंगासन(Bhujangasana)



विधिः 
१.     पेट के बल लेट जाइए। हाथों की हथेलियाँ भूमि पर रखते हुए हाथों को छाती के दोनों ओर रखें। कोहनियां ऊपर उठी हुई तथा भुजाएं छाती से सटी हुई हिनी चाहिए। 
२.     पैर सीधे तथा पंजे आपस में मिले हुए हों। पंजे पीछे की ओर तने हुये भूमि पर ठीके हुए हों। 
३.     श्वास अन्दर भरकर छाती एवं सर को धीरे-धीरे ऊपर उठाइए। नाभि के पीछे वाला भाग भूमि पर टिका रहे। सर को ऊपर उठाते हुये ग्रीवा को जितना पीछे की ओर मोड़ सकते हैं, मोड़ना चाहिए। इस स्थिति में करीब ३० सेकंड रहना चाहिए। 
४.     इस प्रकार ये आसन  यथाशक्ति करें। 
लाभ: 
   कमरदर्द,सर्वाइकल(Cervical), स्पोंडोलाइटिस,स्लिपडिस्क(SLEEPDISC) समस्त मेरुदण्ड(Spine) के रोगो में ये आसन लाभकारी है। 

Saturday, December 27, 2014

भुजंगासन(Bhujangasana)



विधिः 

१.     पेट के बल लेट जाइए। हाथों की हथेलियाँ भूमि पर रखते हुए हाथों को छाती के दोनों ओर रखें। कोहनियां ऊपर उठी हुई तथा भुजाएं छाती से सटी हुई हिनी चाहिए। 

२.     पैर सीधे तथा पंजे आपस में मिले हुए हों। पंजे पीछे की ओर तने हुये भूमि पर ठीके हुए हों। 

३.     श्वास अन्दर भरकर छाती एवं सर को धीरे-धीरे ऊपर उठाइए। नाभि के पीछे वाला भाग भूमि पर टिका रहे। सर को ऊपर उठाते हुये ग्रीवा को जितना पीछे की ओर मोड़ सकते हैं, मोड़ना चाहिए। इस स्थिति में करीब ३० सेकंड रहना चाहिए। 


४.     इस प्रकार ये आसन  यथाशक्ति करें। 

लाभ: 

   कमरदर्द,सर्वाइकल(Cervical), स्पोंडोलाइटिस,स्लिपडिस्क(SLEEPDISC) समस्त मेरुदण्ड(Spine) के रोगो में ये आसन लाभकारी है। 

Tuesday, December 23, 2014

मर्कटासन-१ (Markatasan-1)

मर्कटासन-१ (Markatasan-1)
१.     सीधे लेटकर दोनों हाथों को कंधों के साथ समानान्तर फैलाइए। हथेलियाँ आकाश की ओर खुली हों। फिर दोनों पैरों को घुटनो से मोड़कर
नितम्ब के पास रखें।
२.     अब घुटनों को दाएं ओर जुकाते हुए दाएं घुटने को भूमि पर टिका दें। बायां घुटना दाएं घुटने पर टिका हुआ हो तथा दाएं पैर की एड़ी पर बाएं पैर की एड़ी टिकी हुए हों। गर्दन को बाई ओर घुमाकर रखें। इसी तरह से बाई और से भी आसन करें। 



लाभ :
             कमरदर्द,सर्वाइकल(Cervical), स्पोंडोलाइटिस,स्लिपडिस्क(SLEEPDISC),सियाटिका(SIYATIKA) में विशेष लाभकारी हैं। पेटदर्द(Abdominal pain),दस्त(diarrhea),कब्ज(constipation) एवं गैस को दूर करता है। नितम्ब(hip), जोड़ो(joint) के दर्द में लाभकारी है। 

वीडियो :