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Saturday, January 3, 2015

धनुरासन(Dhanurasana)

धनुरासन (Dhanurasan)

विधिः 
१.     पेट के बल लेट जाइए। घुटनों से पैरों को मोड़ कर एड़ियां नितम्ब के ऊपर रखें। घुटने एवं पंजे आपस में मिले हुए हों। 
२.     दोनों हाथों से पैरों के पास से पकड़िये। 
३.     श्वास को अन्दर भरकर  घुटनों एवं जंघावो को एक के बाद एक उठाते हुये ऊपर की ऑर तने , हाथ सीधे रहें। पिछले हिस्से को उठाने  के बाद पेट के ऊपरी भाग छाती,ग्रीवा एवं सर को भी ऊपर उठाइए। नाभि एवं पेट के आसपास का भाग भूमि पर ही टिके रहे। शेष भाग ऊपर उठा होना चाहिए। शरीर की आकृति धनुष के समान हो जाएगी। इस स्थिति में १० से २५ सेकंड तक रहें। 
४.     श्वास छोड़ते हुए क्रमशः पूर्व स्थिति में आ जाइए। श्वास-पश्वास के सामान्य होने पर ३ - ४  बार करे।   


लाभ: 
नाभि का टलना दूर होता है। स्त्रियों की मासिक धर्म(menstrual) सम्बन्धी रोग में लाभ मिलता है।कमरदर्द,सर्वाइकल(Cervical), स्पोंडोलाइटिस,स्लिपडिस्क(SLEEPDISC) समस्त मेरुदण्ड(Spine) के रोगो में ये आसन लाभकारी है। 

Saturday, December 13, 2014

बद्ध पद्मासन(Baddha Padmasana)


विधि :
१.     पद्मासन में बैठकर बाएं हाथ को पीठ के पीछे से घुमाकर बायें पैर का अंगूठा पकड़ें , इसी प्रकार दायें हाथ को पीछे से लेते हुए दायें पैर का अंगूठा पकड़ें। 
२.     कमर व् रीड की हड्डी सीधी रहे। आँखे बंध रखकर यथाभिमत मन को एकाग्र करे। 

लाभ :
      माताओं ऐवं पुरूषों की छाती का विकास कर सुन्दर बनता है। हाथ,कंधे एवं सम्पूर्ण पृष्ठ भाग के लिए उपयोगी है।